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PM Narendra Modi Became The Target of Heaven As Soon As He Stepped On The Lakshyadip-Lamp.

narendra modi at lakshdeewp
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नमस्कार, नमस्ते

     भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कदम रखा और एक ही दिनमे भारत का स्वर्ग समान ‘लक्षदीव्प’ भारत और विश्व के दिलोमे छा गया |

नरेंद्र मोदी इन लक्षदीव्प

         लक्षद्वीप-भारत  (संस्कृत:अर्थ लक्षद्वीप, एक लाख द्वीप), भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट से 200 से 440 किमी (120 से 270 मील) दूर अरब सागर में स्थित एक द्वीपसमूह है। पहले इन द्वीपों को ‘लक्कादीव-मिनिकॉय-अमिनीदिवि द्वीप’ के नाम से जाना जाता था। यह द्वीपसमूह भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश होने के साथ साथ एक जिला भी है। इस पूरे द्वीपसमूह को लक्षद्वीप के नाम से जाना जाता है, हालाँकि भौगोलिक रूप से यह केवल एक द्वीपसमूह के केन्द्रीय उपसमूह का नाम है। यह द्वीपसमूह भारत का सबसे छोटा से छोटा केंद्र-शासित प्रदेश है और इसका कुल सतही क्षेत्रफल सिर्फ 32 वर्ग किमी (12 वर्ग मील) है, जबकि अनूप क्षेत्र 4,200 वर्ग किमी (1,600 वर्ग मील), प्रादेशिक जल क्षेत्र 20,000 वर्ग किमी (7,700 वर्ग मील) और विशेष आर्थिक क्षेत्र 400,000 वर्ग किमी (150,000 वर्ग मील) में फैला है। इस क्षेत्र के कुल 10 उपखण्ड मिलकर एक भारतीय जनपद की रचना करते हैं। कवरत्ती लक्षद्वीप की राजधानी है, और यह द्वीपसमूह केरल उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। यह द्वीपसमूह लक्षद्वीप-मालदीव-चागोस समूह के द्वीपों का सबसे उत्तरी भाग है, और यह द्वीप एक विशाल समुद्रमग्न पर्वत-शृंखला चागोस-लक्षद्वीप प्रवाल भित्ति के सबसे उपरी हिस्से हैं।

       चूँकि इन द्वीपों पर कोई आदिवासी आबादी नहीं थी और आज भी नहीं हैं, इसलिए विशेषज्ञ इन द्वीपों पर मानव के बसने का अलग-अलग इतिहास सुझाते हैं। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार 1500 ईसा पूर्व के आसपास इस क्षेत्र में मानव बस्तियाँ मौजूद थीं। नाविक एक लंबे समय से इन द्वीपों को जानते थे, इसका संकेत पहली शताब्दी ईस्वी से एरिथ्रियन सागर के पेरिप्लस क्षेत्र के एक अनाम संदर्भ से मिलता है। द्वीपों का उल्लेख ईसा पूर्व छठी शताब्दी की बुद्धिस्ट- बौद्ध जातक कथाओं में भी किया गया है। सातवीं शताब्दी के आसपास मुसलमानों के आगमन के साथ यहाँ इस्लाम का प्रादुर्भाव हुआ ऐसा इतिहासकारो के संदर्भ मिलते है। मध्ययुगीन में, इस क्षेत्र में चोल राजवंश और कैनानोर राजाओं का शासन था। कैथोलिक पुर्तगाली 1498 के आसपास यहाँ पहुँचे, लेकिन 1545 तक उन्हें यहाँ से खदेड़ दिया गया। इस क्षेत्र पर तब अरक्कल के मुस्लिम घराने का शासन था, उसके बाद टीपू सुल्तान का। 1799 में टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद अधिकांश क्षेत्र ब्रिटिशों के पास चले गए और उनके जाने के बाद, 1956 में केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया गया।

      लक्षदीव्प समूह के केवल दस द्वीपों पर मानव आबादी है। 2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार, इस केन्द्र-शासित प्रदेश की कुल जनसंख्या 64,473 थी।आज लगभग 5 लाख पचास हजार से अधिक आबादी है ऐसा प्रमाण सुधीर चौधरीजी ने भी दिया है | अधिकांश आबादी लगभग 95% स्थानीय मुस्लिमों की है और उनमें से भी ज्यादातर सुन्नी सम्प्रदाय के शाफी सम्प्रदाय के हैं। ये द्वीप जातीय रूप से निकटतम भारतीय राज्य केरल के मलयाली लोगों के समान हैं। लक्षद्वीप की अधिकांश आबादी मलयालम बोलती है जबकि मिनिकॉय द्वीप पर माही या माह्ल भाषा सबसे अधिक बोली जाती है। अगत्ती द्वीप पर एक हवाई अड्डा मौजूद है। लोगों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और नारियल की खेती है, साथ ही टूना मछली का निर्यात भी यहासे ही किया जाता है।

लक्षदीव्प इतिहास

      इस क्षेत्र के शुरुआती उल्लेख एरिथ्रियन सागर के पेरिप्लस के एक अनाम लेखक के लेखों में मिलते है। संगम पाटिरुपट्टू में चेरों द्वारा द्वीपों के नियन्त्रण के सन्दर्भ भी मिलते हैं। स्थानीय परम्पराएँ और किंवदन्तियाँ के अनुसार इन द्वीपों पर पहली बसावत केरल के अन्तिम चेरा राजा चेरामन पेरुमल की काल में हुई थी। समूह में सबसे पुराने बसे हुए द्वीप अमिनी, कल्पेनी अन्दरोत, कवरत्ती और अगत्ती हैं। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि पाँचवीं और छठी शताब्दी ईस्वी के दौरान इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म प्रचलन में था। लोकप्रिय परम्परा के अनुसार, 661 ईस्वी में उबैदुल्लाह द्वारा इस्लाम को लक्षद्वीप पर लाया गया था। उबैदुल्लाह की कब्र अन्दरोत द्वीप पर स्थित है। 11 वीं शताब्दी के दौरान, द्वीपसमूह पर अन्तिम चोल राजाओं और उसके बाद कैनानोर के राज्य का शासन था।

       16 वीं शताब्दी में, ओरमुज और मालाबार तट और सीलोन के दक्षिण के बीच के समुद्र पर पुर्तगालियों का राज था। पुर्तगालियों ने 1498 की शुरुआत में द्वीपसमूह पर नियन्त्रण कर लिया था, और इसका मुख्य उद्देश्य नारियल की जटा से बने माल के दोहन था, 1545 में पुर्तगालियों को द्वीप से भगा दिया गया। 17 वीं शताब्दी में, द्वीप कन्नूर के अली राजा/ अरक्कल बीवी के शासन में आ गए, जिन्होंने इन्हें कोलाथिरिस से उपहार के रूप में प्राप्त किया था। अरब यात्री इब्न-बतूता की कहानियों में द्वीपों का भी विस्तार से उल्लेख है।

       1787 में अमिनिदिवि समूह के द्वीप (अन्दरोतअमिनीकदमतकिल्तनचेतलत, और बितराटीपू सुल्तान के शासन के तहत आ गए। तीसरे आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद यह ब्रिटिश नियन्त्रण में चले गए और इन्हें दक्षिण केनरा से जोड़ा गया। बचे हुए द्वीपों को ब्रिटिश ने एक वार्षिक अदाएगी के बदले में काननोर के को सौंप दिया। अरक्कल परिवार के बकाया भुगतान करने में विफल रहने पर अंग्रेजों ने यह द्वीप फिर से अपने नियन्त्रण में ले लिए। ये द्वीप ब्रिटिश राज के दौरान मद्रास प्रेसीडेंसी के मालाबार जिले से जुड़े थे।

लक्षदीव्प स्वतन्त्र भारत

      1 नवम्बर 1956 को, भारतीय राज्यों के पुनर्गठन के दौरान, प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए लक्षद्वीप को मद्रास से अलग कर एक केन्द्र-शासित प्रदेश के रूप में गठित किया गया। 1 नवम्बर 1973 के नया नाम अपनाने से पहले इस क्षेत्र को लक्कादीव-मिनिकॉय-अमिनीदिवि के नाम से जाना जाता था। ऐसा प्रमाण कई इतिहासकारोने अपने लेखो मे दिया है |

         मध्य पूर्व के लिए भारत की महत्वपूर्ण जहाज मार्गों की सुरक्षा के लिए, और सुरक्षा कारणों में द्वीपों की बढ़ती प्रासंगिकता को देखते हुए, एक भारतीय नौसेना आधार, आईएनएस द्वापरक्ष, को कवरत्ती द्वीप पर कमीशन किया गया।

लक्षदीव्प भूगोल

         लक्षद्वीप द्वीपसमूह में बारह प्रवाल द्वीप (एटोल), तीन प्रवाल भित्ति (रीफ) और पाँच जलमग्‍न बालू के तटों को मिलाकर कुल 36 छोटे बड़े द्वीप हैं। प्रवाल भित्ति भी वास्तव में प्रवाल द्वीप ही हैं, हालाँकि ज्यादातर जलमग्न हैं, केवल थोड़ा सा वनस्पति रहित रेतीला हिस्सा पानी के निशान से ऊपर है। जलमग्न बालू तट भी जलमग्न प्रवाल द्वीप हैं। ये द्वीप उत्‍तर में 8 अंश और 12.3 अक्षांश पर तथा पूर्व में 71 अंश और 74 अंश देशान्तर पर केरल तट से लगभग 280 से 480 कि॰मी॰ दूर अरब सागर में फैले हुए हैं।

      मुख्य द्वीप कवरत्ती, अगत्ती, मिनिकॉय और अमिनी हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की कुल जनसंख्या 60,595 है। अगत्ती में एक हवाई अड्डा है और कोच्चि को सीधी उड़ान जाती है।

भारतीय मूँगे के द्वीप

        द्वीपों के अमिनीदिवि उपसमूह (अमिनी, केल्तन, चेतलत, कदमत, बितरा, और पेरुमल पार) और द्वीपों के लक्कादिव उपसमूह (जिनमें मुख्य रूप से अन्द्रोत, कल्पेनी, कवरती, पित्ती, और सुहेली पार शामिल हैं), दोनों उपसमूह जलमग्न पित्ती बालू तट के माध्यम से आपस में जुड़े हैं। 200 किलोमीटर चौड़ा नाइन डिग्री चैनल के दक्षिणी छोर पर स्थित एक अकेला प्रवाल द्वीप मिनिकॉय द्वीप के साथ मिलकर,यह सब अरब सागर में भारत के कोरल द्वीप समूह का निर्माण करते हैं। यह सभी द्वीप प्रवाल से बने हैं और इनकी झालरादार प्रवाल भित्ति इनके किनारों के बहुत करीब है।

 

वनस्पति और जीव

        भारत वन राज्य रिपोर्ट 2021 के अनुसार, लक्षद्वीप में वन क्षेत्र 27.10 वर्ग किमी है। जो कि इसके भौगोलिक क्षेत्रफल का 90.33 प्रतिशत है। लगभग 82 प्रतिशत भूभाग निजी स्वामित्व वाले नारियल के बागानों से आच्छादित है लक्षद्वीप का पिट्टी द्वीप भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत पक्षी अभयारण्य लिए प्रसिद्ध है।

लक्षद्वीप के कुछ लोकप्रिय पर्यटन स्थल इस प्रकार है |

        अगाती : लक्षद्वीप का प्रवेश द्वार, अगाती एक आकर्षक द्वीप है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मित्रतापूर्ण स्थानीय लोगों के लिए जाना जाता है। यहां आप सफेद रेतीले समुद्र तटों पर टहल सकते हैं, नीला पानी में तैर सकते हैं, या नाव की सवारी करके डॉल्फिन को देख सकते हैं।

     मिनीकॉय : लक्षद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप, मिनिकॉय एक लक्ज़री डेस्टिनेशन है जो अपने शानदार रिसॉर्ट्स और प्राचीन प्रवाल भित्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां आप स्कूबा डाइविंग, स्नोर्कलिंग और ग्लास-बॉटम बोट राइड का आनंद ले सकते हैं।[11]

    बांगरम : लक्षद्वीप का एक और आकर्षक द्वीप, बांगरम अपने निर्मल पानी, सफेद रेत और समृद्ध समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्ध है। यहां आप डॉल्फिन के साथ तैर सकते हैं, समुद्री कछुओं को देख सकते हैं, या जंगल में लंबी पैदल यात्रा पर जा सकते हैं।

     कवरत्ती : लक्षद्वीप की राजधानी, कवरत्ती एक व्यस्त द्वीप है जो अपने सुंदर लैगून, ऐतिहासिक लाइटहाउस और जीवंत बाजारों के लिए जाना जाता है। यहां आप लैगून में बोटिंग कर सकते हैं, लाइटहाउस से सूर्यास्त का नज़ारा देख सकते हैं, या स्थानीय बाजारों में स्मृति चिन्ह खरीद सकते हैं।

लक्षद्वीप जाने के लिए आपको परमिट की आवश्यकता होती है, जिसे आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मगर अब नरेंद्र मोदी ने कदम रख दिये है तो हो शकता है बिना परमिशन भारत के लोग जा शकेंगे |

 ‘सत्य की शोध’ के मेरे अतिप्रिय वांचको [readers] जो विश्व समूह के 20 बीस से ज्यादा देश जो हरदिन ‘सत्य की शोध’ के लेखो [articles] पढ़कर प्रमाण के साथ के ‘सत्य’ से परिचित होते है , उन सभी को मेरा नमस्कार-आभार और करजोड़ विनंती है की अगर आपको मेरे लेख अच्छे लगते हो तो कृपया  like और share जरूर करे ताकि हमारा हौसला बुलंद रहे और विश्व समाज के सत्य को प्रमाण के साथ आपके सामने आपकी सेवामे रखते रहे |

आज का दौर ‘मोदी’ दौर है ,आप भलीभाँति सूचित भी है की भारत के अमीर लोगो के लिए मौलड़ीव्प [मालदीव्प] को ही आजतक सबसे सुंदर और धरती का एक अनोखा स्वर्ग माना जाता था ,और सभी अमिरोके लिए यह स्वर्ग समान ही था परंतु जबतक भारत के दिलोमे बसने वाले प्रधानमंत्रीश्री नरेंद्र मोदी के बारेमे मौलडीव -मालदीव्प की सरकार के तीन मंत्रीओने बीभत्स भाषा का उपयोग करके उनको निम्न दिखने की असफल कोशिश की तब तक ही यह मालदीव्प भारत के दिलो मे बसता था | आज भारत के उसी सभी अमीर सेलिब्रिटी जो हरसाल छुटटिया मनाने के लिए लाखो-करोडोका खर्च करके मालदीव्प जाते थे उन्होने भी मालदीव्प को तिरस्कृत कर दिया है जिनका प्रमाण हर सोशियल मीडिया से मिलता | 

         आज मौलड़ीव्प की सरकार और वहा के लोगो को और मनचले बुद्धि विहीन मंत्रिओको भी भारत के लोगो ने एक ही दिन मे हजारो-लाखो की की हुई बूकिंग्स को रद्द [cancle] कर दिये है और भारत की एकता का प्रमाण देकर मौलड़ीव्प को उनकी सीमा दिखा दी है | खुद भारत की एक जानिमानि ट्रावेल कंपनीओने भी मीडिया के सामने स्वीकृत किया है की अभीतक का यह पहला रेकॉर्ड है की एक ही जटके मे हजारो-लाखोकी संख्या मे किए हुए बूकिंग्स रद्द हुए है और अभी भी हो रहे है ,

       भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ एक ही कदम भारत के स्वर्ग समान लक्षदीव्प पर रखा, जिनसे आजतक भारत के लोग अपरिचित थे| उनको रातोरात भारत के दिलोमे बसा दिया , यही नहीं भारत के ‘रतन’ [चुकी अभीतक भारत रत्न मिला नहीं है पर मे व्यक्तिगत ‘सर रतन टाटा’ को भारत का एक अमूल्य ‘रतन ही मानता हु और वो है | उन्होने भी लक्षदीव्प पर अपनी भावनाओको प्रगट की है की वो 2 दो ताज ब्रांड रेसोर्ट्स लक्षदीव्प मे बनाएँगे

1- taj of suheli   110 rooms  , 60 vllas  , 50 water vilas 

2-taj at kadmat  110 rooms , 75 beach villas  ,35 water vilas 

आपका सेवक-लेखक

नमस्ते

     नरेंद्र वाला 

  [विक्की राणा]

 ‘सत्य की शोध’

 

     

satya ki shodh

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1 comment

Sumeet Jhariya January 11, 2024 at 8:54 AM

Very good information

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